Wednesday, January 12, 2011

मेरा नाम, तेरे लब पे, आता तो है

वो खुश है, वो ऐसा जताता तो है,
वो महफ़िल मे सबको हँसता तो है,
हँसी मेरे हिस्से मे आए ना आए,
मुझे कम से कम वो, रुलाता तो है,

वो गैरों की महफ़िल सजाता तो है,
वो महफ़िल मे पीता-पिलाता तो है,
जाम मेरे हिस्से मे, आए ना आए,
ज़हर अपने हिस्से मे आता तो है,

वो महफ़िल मे सबको लुभता तो है,
जमाने से मिलता-मिलता तो है,
वो दर पे मेरे और आए ना आए,
ख्वाबों मे आके जलाता तो है,

मेरी बेवफ़ाई के झूठे ये किस्से,
जमाने मे सबको सुनाता तो है,
मे खुश हूँ के अब तक तेरी महफ़िलों मे
मेरा नाम, तेरे लब पे, आता तो है

1 comment:

  1. प्रिय,

    भारतीय ब्लॉग अग्रीगेटरों की दुर्दशा को देखते हुए, हमने एक ब्लॉग अग्रीगेटर बनाया है| आप अपना ब्लॉग सम्मिलित कर के इसके विकास में योगदान दें - धन्यवाद|

    अपना ब्लॉग, हिन्दी ब्लॉग अग्रीगेटर
    अपना ब्लॉग सम्मिलित करने के लिए यहाँ क्लिक करें

    ReplyDelete